
शब्दों को चाहे हम कितनी सधे ढंग से बुन लें, पहुँचते हैं वे ऐसे कानों में, जो कुछ भी सुन लें… क्योंकि श्रोता के चश्मे से होकर बनते हैं भाव, अनुभवों और मनःस्थिति से आ जाते हैं घुमाव… 👂👂👂👂👂👂 No matter how carefully our words are spun, They reach an ear where their work is […]
दूसरा पहलू / The Other Side
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